Saturday, 16 January 2016

कैसे बना गांव का लड़का वेटर से IAS अधिकारी Story



कैसे बना गांव का लड़का वेटर से IAS अधिकारी Story

मित्रों , IAS बनने का सपना तो बहुत से लोगो का होता है परन्तु साकार कुछ ही लोगों का हो पाता है | यह जरूरी नहीं होता है कि  IAS बनने के लिए किसी शहर का होना आवश्यक हो , और यह भी महत्वपूर्ण नहीं होता की कोई गरीब या साथ में नौकरी करने वाला IAS नहीं बन सकता है | 



इन सभी बातों का खंडन करते हुए आज हम आपको इस आर्टिकल के माध्यम से एक ऐसे होनहार लड़के के बारें में बताने जा रहा हूँ , जो गांव का लड़का वेटर की नौकरी करने वाला कैसे बना IAS ? उसके इस जज्बे को बार-बार नमन करने का पात्र है |

यह कहानी है -तमिलनाडु के वेल्लोर जिले के विनावमंगलम गांव में पैदा हुए जयगणेश की | जिन्होंने ये कर दिखाया की यदि हौसलें बुलंद हो तो सफलता कदम जरूर चूमती है | जयगणेश के दो बहन और एक छोटा भाई था | जयगणेश अपने भाई- बहनों में सबसे बड़े थे | पिता लैदर फैक्ट्री में सुपरवाइजर जिनका मासिक वेतन 4500 रुपए था ,इसीसे परिवार का पालन-पोषण होता था |

8 वीं तक की पढ़ाई गाव के सरकारी स्कूल से की उसके बाद पास के कस्बे में पढ़ने जातें थे | दसवीं के बाद पोलिटेक्निक कॉलेज में पढ़ाई की तथा 91 फीसदी अंकों से इंजीनियरिंग में प्रवेश किया और मैकेनिकल इंजीनियरिंग किया | जब उन्होंने IAS की परीक्षा के बारें में सुना तो उसकी पढ़ाई में लग गए , और चेन्नई में आकर तैयारी शुरू कर दी |


चेन्नई में इंजीनियर के रूप में नौकरी नहीं मिली तो सत्यम सिनेमा में बिलिंग क्लर्क के पद पर कार्य करने लगे । कई बार इंटरवल में वेटर के रूप में सर्व भी किया, परन्तु हौसला को कम नही होने दिया | 

इंजीनियरिंग के बाद जयगणेश की इच्छा थी कि वह किसी नौकरी पर लग जाये , क्योंकि परिवार की हालत काफी बिगड़ती हुई दिखाई दें रही थी | वर्ष 2000 में इंजीनियरिंग करने के बाद जयगणेश नौकरी  की तलाश में बेंगलुरु आ गए । यहां उन्होंने 2500 रुपए महीने की एक कंपनी में नौकरी प्रारम्भ कर दी |
सिविल सर्विस के प्रति रुझान -
जयगणेश बताते हैं कि उन्हें सिविल सर्विस के प्रति पहले से कोई रुझान नहीं था । बेंगलुरु आकर उन्हें यह ज्ञात हुआ कि कलेक्टर ऐसा अधिकारी होता है, जो गांवों के लिए बहुत कुछ करने में सक्षम होता है । बस इसी के उपरांत मन में निश्चय किया कि उन्हें IAS बनना है | यह ज्ञात होने के बाद ततपश्चात  नौकरी छोड़ी और आईएएस बनने के लिए फिर से गांव लौट आए । 

उस समय उनके पास बोनस में मिले 6500 रुपए थे । उन्ही रुपए से स्टडी के लिए किताबें आदि सामग्री खरीदीं । गांव में रहकर नोट्स पढ़ना आरम्भ कर दिया , जिन्हें पोस्ट के जरिए चेन्नई से मंगवातें थे ।


चेन्नई में कोचिंग-
जयगणेश को चेन्नई में सरकारी कोचिंग के बारे में ज्ञात हुआ तो उन्होंने इसके लिए टेस्ट दिया और उसमे क्वालीफाई हो गए । इसमें उन्हें जरूरी सुविधाएं और ट्रेनिंग मिलना शुरू हो गई । कोचिंग के बाद वह गांव में पढ़ाई नहीं करना चाहते थे, परन्तु नौकरी नहीं मिल सकी और उन्हें काफी समस्याओं का सामना करना पड़ा |

वेटर के रूप में कार्य-
सत्यम सिनेमा की कैंटीन में उन्हें बिलिंग क्लर्क के पद पर काम मिला तथा इंटरवल में वह वेटर के तौर पर उन्हें काम करना पड़ता था |  उनके मन में कभी भी इस बात की चिंता नहीं हुई कि वह एक मैकेनिकल इंजीनियर होकर भी उन्हें यह काम करना पड़ रहा है | उनका पूरा ध्यान उनके लक्ष्य पर ही केंद्रित था कि चेन्नई में रहकर सिविल सर्विस की तैयारी कर सकें | छह बार उन्हें विफलता का सामना करना पड़ा |  अंतत: सातवें प्रयास में सफलता प्राप्त हो गई |


दोस्तों, इस आर्टिकल के माध्यम से हमनें जाना कि जयगणेश को किस प्रकार कठिनाइयों का सामना करने के बावजूद भी अपने लक्ष्य से डगमगाए नही , और मुसीबतों का डंटकर सामना किया | आपके IAS बनने के सपने में इसके माध्यम से आपको अवश्य ही सहायता प्राप्त होगी |

यदि अभी भी आपके मन में कोई प्रश्न है तो आप आप कमेंट बॉक्स के माध्यम से अपने प्रश्नों को पूछ सकते हैं, आपके सवालों, प्रतिक्रिया और सुझाव का हमें हमेशा इंतज़ार रहेगा | अगर आपको ये आर्टिकल पसंद आया हो तो हमारे फेसबुक पेज को like करना न भूलें |





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2 comments:

  1. me ias ka hausala hai lekin kycha na kucha adachan aa rahi muche batao kya kroo

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  2. kya ias hindi midian se ban sakate hai

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