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Thursday, 7 December 2017

क्या है अयोध्या विवाद - जानिये कुछ ख़ास बाते

क्या है अयोध्या विवाद - जानिये कुछ ख़ास बाते
अयोध्या विवाद एक राजनीतिक, ऐतिहासिक और सामाजिक-धार्मिक विवाद है |  इसके  विवाद का मूल विषय हिंदू देवता राम की जन्मभूमि और बाबरी मस्जिद की स्थिति को लेकर है ।  विवाद इस बात को लेकर है ,कि क्या हिंदू मंदिर को ध्वस्त कर, वहां मस्जिद का निर्माण किया या मंदिर को मस्जिद के रूप में बदल दिया गया । दोनों धर्मो के लोग अपने –अपने समुदाय से जुडी हुई बात कहते है | इस प्रकार यह मामला वर्ष 1885 में पहली बार न्यायालय में पंहुचा था | वर्ष 1992  में बाबरी मस्जिद को गिराये जाने  के कारण यह विवाद और गंभीर और प्रसिद्ध हो गया | उस समय इस विवाद में लगभग 2000 लोगो की मृत्यु हो गयी थी |यह विवाद काफी लम्बे समय से चल रहा है | अयोध्या विवाद से  सम्बंधित घटनाओं के बारे में जानकारी दी जा रही है |



अयोध्या विवाद
अयोध्या विवाद दो धर्मो की आस्था के साथ-साथ राजनीति, इतिहास और समाजिक विवाद का विषय बन गया है. यह विवाद कई वर्षो से चल रहा है |  वर्ष 1992 में विवादित ढांचा को गिराए जाने के बाद यह हिंदुओं और मुसलमानों के बीच धार्मिक प्रतिष्ठा का कारण बन गया | राममंदिर आस्था के साथ-साथ दोनों समुदायों के लिए राजनीति का विषय बन चुका है | हिंदुओं का दावा है कि वहां राममंदिर था ,और मुगल आक्रमणकारी बाबर ने राममंदिर को तोड़कर मस्जिद बनाई या मंदिर को मस्जिद का रूप दे दिया | भगवान श्रीराम का जन्म अयोध्या में हुआ था | इसलिए यह तो सिद्ध है ,की वहां श्रीराम का मंदिर था ,और मुगल शासनकाल में उससे छेड़छाड़ की गई | इस मंदिर का निर्माण विक्रमादित्य द्वितीय ने करवाया था | इस प्रकार यह विवाद आज भी चल रहा है |


विवाद – कब क्या हुआ
1528: अयोध्या में जिस स्थान को भगवान राम का जन्म स्थान माना जाता है ,उसी स्थान पर मुग़ल सम्राट बाबर द्वारा एक मस्जिद का निर्माण करवाया गया था ,जिसके कारण इस मस्जिद का नाम बाबरी मस्जिद पड़ा |

1853: इस वर्ष मुस्लिम समुदाय के लोगो ने मंडित को तोड़कर मस्जिद का निर्माण किया | जिसके कारण हिन्दू और मुस्लिम समुदाय के लोगो के मध्य पहली हिंसा हुई |

1859: ब्रिटिश सरकार ने तार के द्वारा विवादित स्थल को बाह्य और आंतरिक दो भागो में विभाजित कर हिन्दू और मुस्लिम समुदाय के लोगो को अलग-अलग पूजा करने का आदेश दिया |

1885: हिन्दू समुदाय की तरफ से महंत रघुबर दास ने बाबरी मस्जिद से लगे एक राम मंदिर के निर्माण की इजाजत के लिए पहली बार फैज़ाबाद अदालत में याचिका दायर की |


23 दिसंबर, 1949: मस्जिद के केंद्र स्थल पर लगभग 50 हिन्दुओं  नें  मिलकर भगवान राम की मूर्ति स्थापित कर दिया ,और नियमित रूप से पूजा -अर्चना करने लगे ,जिसके कारण मुसलमानो ने वहां नमाज़ पढ़ना बंद कर दिया

16 जनवरी, 1950: फैजाबाद अदालत में गोपाल सिंह विशारद ने एक अपील दायर कर रामलला की पूजा-अर्चना की विशेष इजाजत मांगी और वहां से मूर्ति हटाने पर न्यायिक रोक की भी मांग की ।

5 दिसंबर, 1950: हिन्दुओ द्वारा बाबरी मस्जिद में राममूर्ति को रखने तथा नियमित पूजा करने पर महंत परमहंस रामचंद्र दास ने मुकदमा दायर किया ,और मस्जिद का नाम ढांचारखा गया |

17 दिसंबर, 1959: विवादित स्थल हस्तांतरित करने के लिए निर्मोही अखाड़ा द्वारा मुकदमा दायर किया गया ।

18 दिसंबर, 1961: बाबरी मस्जिद के मालिकाना हक के लिए उत्तर प्रदेश सुन्नी वक्फ बोर्ड ने मुकदमा दायर किया ।

1984: विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) ने एक समिति का गठन किया और बाबरी मस्जिद के ताले खोलने तथा राम जन्मस्थान को एक विशाल मंदिर के निर्माण के लिए अभियान शुरू किया |


1 फरवरी, 1986: इस विवादित स्थान पर हिन्दुओ को पूजा करने की इजाजत फैज़ाबाद जिला न्यायाधीश द्वारा दी गयी ,जिसके कारण ताले पुनः खोले गए | इससे मुस्लिम समुदाय नाराज हो गया ,और विरोध में बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी का गठन किया ।

जून 1989: भारतीय जनता पार्टी ने वीएचपी को औपचारिक समर्थन देना शुरू करके मंदिर आंदोलन की गति को और तीव्र कर दिया |

1 जुलाई, 1989: भगवान रामलला विराजमान नाम से पांचवा मुकदमा दाखिल किया गया ।

9 नवंबर, 1989: तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी की सरकार ने बाबरी मस्जिद के नजदीक शिलान्यास की इजाजत दी ।

25 सितंबर, 1990: बीजेपी अध्यक्ष लाल कृष्ण आडवाणी ने गुजरात के सोमनाथ से उत्तर प्रदेश के अयोध्या तक रथ यात्रा निकाली, जिसके बाद साम्प्रदायिक दंगे प्रारंभ हुए ।

नवंबर 1990: बीजेपी अध्यक्ष आडवाणी को बिहार के समस्तीपुर में गिरफ्तार कर लिया गया । जिसके कारण बीजेपी ने तत्कालीन प्रधानमंत्री वी.पी. सिंह की सरकार से समर्थन वापस ले लिया । सिंह ने वाम दलों और बीजेपी के समर्थन से सरकार बनाई थी |

अक्टूबर 1991: उत्तर प्रदेश में कल्याण सिंह सरकार ने बाबरी मस्जिद के आस-पास की 2.77 एकड़ भूमि को अपने अधिकार में ले लिया ।


6 दिसंबर, 1992: इस दिन हिन्दू समुदाय के लोगो ने हजारो की संख्या में अयोध्या पहुँचकर बाबरी मस्जिद को गिरा दिया ,और एक अस्थाई राम मंदिर का निर्माण किया गया | जिससे पूरे देश में सांप्रदायिक दंगो की शुरुआत हो गयी | मस्जिद के पुनर्निर्माण का वादा प्रधानमंत्री पी.वी. नरसिम्हा राव ने  किया।

16 दिसंबर, 1992: मस्जिद की तोड़-फोड़ की जिम्मेदार स्थितियों की जांच के लिए एम.एस. लिब्रहान आयोग का गठन हुआ।

जनवरी 2002: विवाद को सुलझाने के लिए हिंदुओं और मुसलमानों से बातचीत करने के सम्बन्ध में प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने अपने कार्यालय में एक अयोध्या विभाग शुरू किया |

अप्रैल 2002: इस विवादित स्थल पर मालिकाना हक को लेकर उच्च न्यायालय के तीन जजों की पीठ ने सुनवाई शुरू की

मार्च-अगस्त 2003: भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने इलाहबाद उच्च न्यायालय के निर्देशों पर विवादित स्थल पर खुदाई की गई ,क्योकि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण का दावा था ,कि मस्जिद के नीचे मंदिर के अवशेष होने के प्रमाण मिले हैं।मुस्लिम समुदाय इसे लेकर अलग -अलग मत रख रहे थे |

सितंबर 2003: एक अदालत ने फैसला दिया कि मस्जिद के विध्वंस को उकसाने वाले सात हिंदू नेताओं को सुनवाई के लिए बुलाया जाए ।


अक्टूबर 2004: आडवाणी ने अयोध्या में मंदिर निर्माण की बीजेपी की प्रतिबद्धता दोहराई ।

जुलाई 2005: संदिग्ध इस्लामी आतंकवादियों ने विस्फोटकों से भरी एक जीप का इस्तेमाल करते हुए विवादित स्थल पर मंदिर को गिराने काप्रयास किया ,परन्तु  सुरक्षा बलों ने पांच आतंकवादियों को मार गिराया ।

जुलाई 2009: लिब्रहान आयोग ने गठन के 17 साल बाद प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को अपनी रिपोर्ट सौंपी ।

28 सितंबर 2010: सर्वोच्च न्यायालय ने इलाहबाद उच्च न्यायालय को विवादित मामले में फैसला देने से रोकने वाली याचिका खारिज करते हुए फैसले के मार्ग को आगे बढ़ाने का आदेश दिया ।

30 सितंबर 2010: इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया ।

21 मार्च 2017: राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने मध्यस्थता की पेशकश की है. चीफ जस्टिस जे एस खेहर ने कहा है कि अगर दोनों पक्ष राजी हो तो वो कोर्ट के बाहर मध्यस्थता करने को तैयार हैं |

5दिसम्बर 2017: सुप्रीम कोर्ट में अयोध्या के राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद मामले की अहम सुनवाई शुरू हुई और कुछ समय बाद अगली तारीख 8 फरवरी 2018 अगली सुनवाई के लिए निश्चित कर दी गयी |


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