Thursday, November 15, 2018

ग्रेच्युटी क्या होता है | कैसे होगी इसकी गणना | कैसे होगा ग्रैच्यूटी का पेमेंट - जाने सब कुछ


ग्रेच्युटी क्या होता है 

किसी संस्था या कम्पनी द्वारा अपने कर्मचारी के वेतन का एक भाग भविष्य निधि और ग्रेच्युटी (उपदान) के रूप में काटा जाता है और यह राशि उस कर्मचारी को मुख्य रूप से रिटायर्मेंट के समय दिया जाता है |  किसी भी कर्मचारी को ग्रेच्युटी का लाभ पांच वर्ष  की निरंतर सेवा के बाद प्राप्त होती है | ग्रेच्युटी क्या होता है, इसकी गणना और पेमेंट कैसे होता है ? इन सभी से सम्बंधित जानकारी आपको यहाँ विस्तार से बता रहे है |

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ग्रेच्युटी 
ग्रेच्युटी वेतन का वह भाग होता है, जो कर्मचारियों की सेवाओं के बदले एक निश्चित अवधि के बाद प्रदान किया जाता है | आय कर अधिनियम की धारा 10 (10) के अनुसार, किसी भी निगम या कंपनी में न्यूनतम पांच वर्ष की सेवा अवधि पूरी करने वाले प्रत्येक कर्मचारी को ग्रेच्युटी प्राप्त करनें का अधिकार होता है |

ग्रेच्युटी अधिनियम, 1972 के अनुसार, कर्मचारी को उसकी सेवा के प्रत्येक वर्ष में 15 दिनों का वेतन ग्रेच्युटी के रूप में दिया जाता है । इस अधिनियम में वह कर्मचारी आते हैं, जिन्हें कंपनी वेतन पर रखती है, प्रशिक्षुओं को ग्रेच्युटी नहीं मिलती है । ग्रेच्युटी के अंतर्गत मिलनें वाली 20 लाख तक की राशि पर किसी प्रकार का टैक्स नही देना पड़ता है, परन्तु यह कानून ऐसे प्रतिष्ठानों में लागू होता है, जहां कर्मचारियों की संख्या कम से कम 10 हो । ग्रेच्युटी का मुख्य उद्देश्य कर्मचारियों को उनकी सेवानिवृत्ति के बाद सामाजिक सुरक्षा प्रदान करना है |


कैसे होगी इसकी गणना
यदि आप किसी निजी कंपनी में पांच वर्ष से अधिक समय तक कार्य करते हैं, तो कंपनी आपकी सेवा के बदले ग्रेच्युटी के रूप में एक अतिरिक्त लाभ प्रदान करती है, मुख्यतः ग्रेच्युटी रिटायरमेंट के बाद प्राप्त होती है | यदि आप जॉब बदल रहे हैं अथवा किसी कारणवश बीच में छोड़ रहे हैं तो कुछ शर्तों के पूरा करनें पर इसे पहले भी प्राप्त किया जा सकता है | कोई भी कर्मचारी ग्रेच्युटी प्राप्त करनें हेतु तभी योग्य माना जाता है, जब वह कम से कम 5 वर्ष की नौकरी पूर्ण कर चुका हो | कर्मचारी की मृत्यु हो जाने या विकलांग हो जाने की स्थिति में उन्हें ग्रेच्युटी 5 वर्ष से पहले भी दी जा सकती है | ग्रेच्युटी के रूप में आपको प्राप्त होनें वाली राशि कितनी होगी, इसके लिए कानूनी रूप से कोई प्रावधान नहीं है |

कोई भी कम्पनी अथवा संस्था मुख्य रूप से एक प्रचलित फॉर्मूले से ग्रेच्युटी की रकम निर्धारित करते हैं | ग्रेच्युटी दो बातों पर निर्भर करती है, पिछला वेतन और सेवा की अवधि (साल) | आपको कितनी ग्रेच्युटी मिलेगी, इसे ज्ञात करनें हेतु निजी क्षेत्र के कर्मचारी के लिए पेमेंट ऑफ ग्रेच्युटी एक्ट, 1972 को दो भागों में विभाजित किया गया है, जो इस प्रकार है –

1.एक्ट के अंतर्गत आने वाले कर्मचारी  
2.एक्ट के अंतर्गत नहीं आने वाले कर्मचारी


एक्ट के अंतर्गत आने वाले कर्मचारी की गणना

फॉर्मूला- (15 X पिछली सैलरी X काम करने की अवधि) / 26

यहां पिछली सैलरी का अर्थ बेसिक सैलरी, महंगाई भत्ता और बिक्री पर मिलने वाला कमीशन है |

मान लीजिए किसी व्यक्ति का पिछला वेतन 50,000 रुपये महीना है, उसने किसी कंपनी में 15 साल 8 महीने काम किया, ऐसे में उसकी ग्रेच्युटी होगी-

(15 X 50,000 X 16)/26 = 4.61 लाख रुपये |

इसमें कार्य करने के दिन 15 वर्ष 8 माह होने के कारण इसे 16 लिया गया है, यदि कार्य करने के दिन 15 वर्ष 5 माह होते तो इसे 15 ही माना जाता |

एक्ट के अंतर्गत नहीं आने वाले कर्मचारी की गणना
अंतिम माह के वेतन से ठीक पहले के 10 महीने की सैलरी के औसत को ग्रेच्युटी के लिए औसत सैलरी मानी जाती है | इसकी गणना इस प्रकार की जा सकती है-

उदाहरण - (15 X 50,000 X 15) /30 = 3.75 लाख रुपये

किसी कर्मचारी की मृत्यु हो जाने की स्थिति में ग्रेच्युटी की रकम नौकरी की कुल अवधि पर आधारित होगी, जो अधिकतम 20 लाख रुपये तक हो सकती है | पूर्व यह सीमा 10 लाख रुपये थी, जिसे अब सरकार ने बढ़ाकर दोगुना कर दिया है |


ग्रैच्यूटी का पेमेंट
नियम के अनुसार, जब कोई कर्मचारी ग्रैच्यूटी प्राप्त करनें योग्य हो जाता है, तो उन्हें इसके लिए 30 दिनों के अन्दर आवेदन  होता है, यदि रिटायर होने की तिथि की जानकारी है, तो 30 दिनों के अंदर आवेदन करना अनिवार्य है । आवेदन मिलने के 15 दिनों के अंदर एंप्लॉयर को बताना होगा, कि ग्रैच्यूटी का कितना पैसा दिया जाएगा और कब तक दिया जाएगा । ग्रैच्यूटी की पेमेंट की अधिकतम सीमा भी 30 दिन है । यदि किसी एंप्लॉयर ग्रैच्यूटी का आवेदन रिजेक्ट कर देता है, तो उसे इसका कारण बताना होगा । यदि ग्रैच्यूटी का दावा नॉमिनी या कानूनी उत्तराधिकारी कर रहा है, तो एंप्लॉयर गवाह या सबूत की मांग कर सकता है । ग्रैच्यूटी की पेमेंट कैश, डिमांड ड्राफ्ट या चेक के माध्यम से की जा सकती है ।


नॉमिनी या उत्तराधिकारी को ग्रेच्युटी
यदि किसी कर्मचारी की नौकरी के दौरान उसकी मृत्यु अथवा अपंगता हो जाती है, तो ऐसी स्थिति में कम्पनी कर्मचारी के उत्तराधिकारी को ग्रैच्यूटी की राशि प्रदान करेगी | इसके लिए यह आवश्यक नही है, कि कर्मचारी ने 5 वर्ष कार्य किया है या नहीं । कानून में कहा गया है, कि यदि कर्मचारी का नॉमिनी नाबालिग है, तो सहायक लेबर कमिश्नर की यह जिम्मेदारी है कि वह ग्रैच्यूटी के पैसे को नॉमिनी के नाम से एसबीआई या किसी अन्य राष्ट्रीय बैंक में टर्म डिपॉजिट के रूप में लगाए जिसका लाभ नॉमिनी के बालिग होने के बाद मिल सके ।


ग्रैच्यूटी की समाप्ति
आपके लिए यह जानकारी भी आवश्यक है, कि आपकी आपकी ग्रैच्यूटी जब्त भी की जा सकती है । ऐक्ट के अनुसार, यदि  किसी कर्मचारी की सेवाएं उसके बुरे व्यवहार, ऑफिस की संपत्ति को हानि पहुंचाए जाने पर समाप्त की जाती हैं, तो उसकी भरपाई ग्रैच्यूटी के माध्यम से की जा सकती है, अर्थात आपकी पूरी ग्रैच्यूटी पूर्णतः समाप्त की जा सकती है |

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