क्या है " RO RO Ferry Scheme " - जानिये - Sarkari Naukri Career

Wednesday, October 25, 2017

क्या है " RO RO Ferry Scheme " - जानिये


क्या है " RO RO Ferry Scheme " - जानिये

रो-रो फेरी सर्विस की नीव गुजरात के मुख्यमंत्री द्वारा जनवरी 2012 में रखी गयी थी | जिसके पहले चरण का उदघाटन 22 अक्टूबर 2017 को भारत के प्रधानमंत्री द्वारा किया गया | इस सर्विस की शुरुआत भावनगर के घोघा और भरूच के दहेज़ के बीच हुई है | इन दोनों के मध्य 310 किमी0 की दूरी  है ,जिसको सड़क द्वारा तय करने में 10 से 12 घंटे का समय लगता है | इस सर्विस की शुरुवात से यही सफ़र मात्र 32 किमी0 का हो गया है जिसको पूरा करने में 1 से 2 घंटे का समय लगेगा |



कैसे तैयार हुआ पूरा प्रॉजेक्ट :-
इस परियोजना को शुरू करने में लगभग 615 करोड़  रुपये व्यय  हुए है | इसके पहले चरण की शुरुवात में 250 यत्रियो को लाने व ले जाने की  है जबकि आगे आने वाले समय में यह संख्या 500 यत्रियो की हो जाएगी परन्तु इसे पूरा करने में लगभग 1 वर्ष का समय और लगेगा |
अभी इसका किराया 600 रुपये प्रति व्यक्ति ही  रखा गया है , आगे आने वाले समय  में फेरियो और  यत्रियो की संख्या बढ़ने पर  इसके किराये में वृद्धि या कमी की जा सकती है | इस फेरी में यत्रियो के साथ-साथ सामान को भी ले जाया जा सकता है परन्तु अभी सामान लाने या ले जाने के लिए किसी प्रकार की जानकारी नहीं दी गई है | ऐसा अनुमान लगाया जा रहा है जल्द ही यह सुविधा भी शुरू हो जाएगी |


पहले भी हुआ था एक प्रयास :-
रो-रो फेरी सर्विस प्रधानमंत्री जी का ड्रीम प्रोजेक्ट था जिसकी शुरुआत 5 वर्ष पूर्व हुई थी | उस समय श्री नरेन्द्र मोदी जी गुजरात के मुख्यमंत्री पद पर थे ,अभी हाल ही में इसके पहले चरण की शुरुआत की गई है | वर्ष 2018 में दूसरे  चरण की शुरुआत होने की संभावना है | इन पांच वर्षो में अथक प्रयासों के कारण ही यह सेवा शुरू की जा सकी है ,शायद ही गुजरात के लोगो ने कभी इसकी कल्पना की होगी परन्तु इसको सुचारू रूप से चलते हुए देखकर लोगो के जीवन पर, उनकी सोंच पर विशेष रूप से परिवर्तन हुआ है  | इस प्रोजेक्ट की शुरुआत अहमदाबाद और भावनगर के बीच व्यापार बढने की दिशा में मजबूती मिलेगी  |

रो-रो फेरी सर्विस का लोगों पर प्रभाव :-
इस सुविधा से 6.5 करोंड़ लोगो के जीवन शैली में परिवर्तन कर दिया है  | अभी एक ही फेरी होने के कारण दिन में यह सेवा दिन में  2-3 बार ही दी जा रही है ,फेरियो  की संख्या बढ़ने के आधार पर फेरी के आवागमन की संख्या में वृद्धि कर दी जाएगी | इस सेवा के शुरू होने से पहले यात्रियों को यह सफ़र पूरा करने में 10 घंटे का समय लगता था ,साथ ही काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता था | फेरी की शुरुवात से व्यापार में भी वृद्धि होगी और लोगो को रोजगार मिलने के अवसर प्राप्त होगे ,लोगो का समय सफ़र की जगह अपनी अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में लगेगा साथ ही लोगो के अन्दर कार्य करने की क्षमता में वृद्धि होगी | वास्तव में यह सुविधा गुजरात के लोगो के लिए चमत्कार साबित होगी साथ ही लोगो को रोजगार के लिए इधर-उधर नहीं जाना पड़ेगा |



यह  दक्षिण एशिया का पहला सबसे विशाल प्रोजेक्ट है | इस सेवा के साथ ही गुजरात के लोगो के लिए अन्य और प्रोजेक्टों के शुरू होने की संभावना है जैसे गुजरात में समुद्रतट का 1600 किमी0 का भाग है जिसमे शिप बिल्डिंग पार्क ,शिप ब्रेकिंग के नए नियम और छोटे बंदरगाहों को बढ़ाने व कचरे से विधुत उत्पादन की प्रक्रिया चल रही है | प्रधानमंत्री द्वारा इस फेरी सर्विस की शुरुआत भविष्य में हजीरा ,जाफराबाद व दमन्दीव जैसी जगहों पर होगी | आगे आने वाले समय में यहा अन्य कई प्रकार के प्रोजेक्ट शुरू करने के प्रयास किये जा रहे है | 


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