Thursday, 31 December 2015

कैसे बनाये अच्छी Communication Skills- जानिये ये बाते

कैसे बनाये अच्छी Communication Skills- जानिये ये बाते

दोस्तों आज हम इस article के माध्यम से Communication Skill develop के बारे में बताने जा रहे है |
जिसके द्वारा हम  Communication Skill को कैसे develop करें जानेंगे | यदि आपकी वार्तालाप प्रभावी है तो आपको हर जगह सफलता प्राप्त होगी | आपकी  Communication Skill अच्छी है तो आप सभी रूप से प्रभावशाली रहेंगे , क्योंकि सर्वप्रथम हमारा communication ही लोगो के समक्ष दिखाई देता है |

Effective communication skill develop करने में नीचे दिए गए तरीको के माध्यम से आसानी से किया जा सकता है-

SKILL word का रूप -

·        S- Supportive Talker
·        K- Knowledgeable individual
·        I - Intelligent questioner
·        L- Logical Start & End
·        L- Lovely Listener

Supportive Talker (बातचीत में सहयोगी और प्रेरित करने वाला) -

जब हम किसी से बात कर रहे तो हमे उसे बोलने का मौका देना चाहिए | हमे उसे समझने के लिए उसकी बात लगातार सुननी चाहिए | फिर हम जान सकेंगे की वह चाहता क्या है , और हमे बात के लिए प्रेरित करते रहना चाहिए , और जब भी हम बातो का communication करे तो वो हमे eye contact बनाकर करना चाहिए जिससे सामने वाले को लगे की हमारा ध्यान पूर्ण रूप से उसकी बातो पर है | इसलिए सही communication के लिए eye contact नही टूटना चाहिए |

Knowledgeable Individual (ज्ञानी या शिक्षित व्यक्ति)-

अच्छे communication के लिए ज्ञानी और शिक्षित होना भी अत्यंत आवश्यक है क्योंकि अच्छा कम्युनिकेशन तभी बन सकता है जब हमारे अंदर ज्ञान उस विषय से संबंधित ज्ञान हो | ज्ञान होने पर हमारे अंदर अहंकार नही होने देना क्योंकि जब हमारे अंदर अहम होगा तो हम सही कम्युनिकेशन नही कर पाते है , क्योंकि जब अहम में बात करेंगे तो सामने वाले को हमारा कम्युनिकेशन नही पसंद आएगा | तब हमारी कम्युनिकेशन स्किल को अच्छा नही कहा जायेगा | जिस विषय में हमे ज्ञान न हो उसपर हमे बात नही करनी चाहिए ऐसे स्थिति में हमे सामने वाले से बस चुप रहकर उस विषय में ज्ञान लेते रहना चाहिए | 

इसलिए ये कहा गया है -

" Better to remain silent and be thought a fool than to speak out and remove all doubt."
            अर्थात  बोल कर सारा संदेह ख़तम कर देने से अच्छा है चुप रह कर बेवकूफ समझा जाना |
                                                                                             - Mark Twain
Intelligent Questioner (बुद्धिमान प्रश्नकर्ता)-

हमे किसी की बात को ध्यान पूर्वक सुनकर उससे सही समय पर सही प्रश्न पूछने होते है क्योंकि ऐसा करने को वक्ता को महशूस होता है कि उसकी बात को ध्यान पूर्वक सुना जा रहा है | इससे आप एक अच्छे प्रश्नकर्ता के साथ - साथ अच्छे श्रोता भी बनते है | बात करते समय हम किस तरह के प्रश्न रख सकते है जैसे -

·        यदि आपको कोई बात जाननी है तो प्रश्न कीजिये।
·        यदि आपको सामने वाले की मन की स्थिति समझनी है तो प्रश्न कीजिये।
·        यदि आपको अपनी बातों पर हाँ या ना कहलवाना है तो प्रश्न कीजिये।
·        यदि आपको सामने वाली की अपेक्षाएं या समस्याओं से रूबरू होना है तो प्रश्न कीजिये।
·        यदि आपको विश्वास दिलाना है कि आप उसकी बातों में दिलचस्पी दिखा रहे हैं तो प्रश्न कीजिये।

Logical Start & End (तार्किक शुरूआत और अंत)-
किसी से पहली बार बात करना शुरू करना बहुत बड़ी बात होती है | बात को शुरू करने की भी एक कला होती है किसी से बात करना ऐसे भी शुरू नहीं हो जाता है |

 बात को शुरू करने के लिए आप इन topic पर बात कर सकते है जैसे-
·        खेल जगत के बारे में
·        मौसम के बारे में
·        शहर के बारे में
·        राजनीति, शिक्षा के बारे में
·        फ़िल्मी जगत न्यूज़ पर आदि पर सामान्य बातचीत |

इस काम को करने के लिए यदि आपके चेहरे पर हल्की सी मुस्कराहट रहे तो और भी ज्यादा अच्छा है | आगे बढ़कर बात करना और स्माइल के साथ हाथ मिलकर शुरुआत करना इतना भी मुश्किल काम नही है |

Lovely Listener (प्यारे श्रोता)-
दोस्तों अच्छा श्रोता होना बहुत बड़ा गुण है जो ये सभी में नही होता है | ये गुण बहुत कम लोगो में होता है |आजकल सभी के पास कहने को तो सब कुछ रहता है लेकिन सुनने के लिए जरा-सा भी धैर्य नहीं रहता है |अधिकतम वही लोग समाज में पसंद किये जाते हैं जो कम बोलते है  और ज्यादा सुनते हैं |

 कुछ नियम जो आपको सुनने के समय याद रखने होते है -

·        आपका पूरा ध्यान सुनने पर होना चाहिए |
·        सुनते समय टीवी देखने या मोबाइल का प्रयोग न करे |
·        बात के मध्य में हस्तक्षेप न करे नही तो वह विषय से भटक सकता है |
·        पूरी बात सुनें, बिना पूरी बात सुनें बात के मध्य में अपना मत न रखे अपना मत बात पूर्ण होने पर ही रखे |
·        बीच-बीच में प्रश्न पूछें, जहाँ भी आपको डाऊट लगे।
·        सहानुभूति और समझदारी का परिचय दें।
·        यह जताएं कि आपने उनकी बातों को गंभीरता से सुना है।

दोस्तों अब मैं उम्मीद करता हूँ कि अब आपको इस article द्वारा अवश्य ही कुछ सीख मिलेगी | यदि आपके भी मन में भी कोई सवाल करियर सम्बंधित है तो आप कमेंट बॉक्स के माध्यम से जरूर पूछिये, आपकी प्रतिक्रिया और सुझाव का हमें इंतज़ार रहेगा  | अगर आपको ये आर्टिकल पसंद आया हो तो हमारे फेसबुक पेज को like करना न भूले |

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